#1971 Film


मैं मानव कौल की बहूत बडी फॅन हू . कुुुछ दिन पहले उनकी किताब पर लिखी उस पंक्तियों का दिल पर राज हुुुआ है। बहूत दूर कितना दुर होता है से लेकर अंतिमा तक का अंतिम सफर वाकई शानदार है ।
आज अनाजाने मैं मुझे मानव कौल की 1971 की इन्स्टा पर पोस्ट दिखी . मुझे तो आज तक ये भी नहीं पता था . मानव कौल लेखक होने के साथ साथ इतने अच्छे Actor भी है ।
इस फिल्म में मानव कौल के अलावा मनोज वाजपेयी ,पीयूष मिश्रा, दीपक डोबरियाल और रवि किशन जैसे अभिनेता हैं. फिल्म में सभी कलाकारों की एक्टिंग की खूब तारीफ हो रही है. बता दें कि ये फिल्म 2007 में रिलीज हुई थी. उस वक्त समीक्षकों ने बहुत सराहा था लेकिन फिल्म कई वजह से दर्शकों के बीच कायदे से नहीं पहुंच पाई थी.
इस मुव्ही की कुछ बाते सीधेतौर पर दिल को चुभती है । इंडियन होने का फर्क से अहसास दिलाती है ।

मुव्ही के इस Dialogue ने मुझे आखरी मैं रूलाया तो है पर वो अपने वतन पर मर मिटने की चिंगारी को अंदर से जलाया है ।

अभी पाकिस्तान मैं पंजाबी रहते है ??
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  • हा रहते हैं
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    और सिंधी ???
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  • हा वो भी
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    और अपने मुसलमान भाई तो रहते ही है
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  • हा तो क्या हुआँ ??
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    नहीं मैं सोच रहा था ये अपने हिंदुस्तान मैं भी रहते है
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  • रहते है तो ??
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    अबे तो फिर पाकिस्तान बनाया ही क्यूँ ??
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    -गलती हो गयी आगे सें नहीं बनायेंगे !
    (Dialogue 1971)

निंदा फाजली की यह गझल इस मुव्ही को देखकर याद आयी,
दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता. दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए ~

युट्यूब पर आप ये मुव्ही देख सकते है

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