In memoriam of spring

The season of joy
when,
look at twinkling star
in the sky
cold Wave enjoy

spring shower
spring flower
in spring
cuckoo beginning to sign

October march snow of war
coldest November
frozen river,
sun ries late
goes to wake up mate

fireside in morning
sometimes they come there
in evening
people come outdoors
most sit in indoors

kashmir , shimla and Sikkim
they all snow
wide river are slowly flow

a sip of coffee celebrate too live
they were very delicious
in memoriam of spring !

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अंतर्भाव

मला लिहिता येत नाही
गीत वेदनेचे
बंधाऱ्याच्या पलीकडे मांडता येत नाही
शोक जीर्ण मृत शरीराच्या समाधीचे !
आक्रोशाच्या गिळंकृत ध्वनीतूनही
त्यांच्या देहाकडे बघून
आवाजाच्या ऐकू येतात कांठाळ्या
आणि किती अशा डोंगर कपारीच्या
चिरडून टाकणाऱ्या बातम्या !
सुन्न करते
ती कालची माणूस वस्ती
आज उध्वस्त होताना बघून
वाटतं…. पुन्हा , पुन्हा उभी राहिल
का इथे माणसं ??

उगता हुआ सुरज

उगता हुआ सुरज
और बेतहाशा रूखे पेड़ है खड़े
पतझड़ से युही कुछ नम से हो गयें सदियारे…
कुछ है हरे भरे
बता रहें ,
शहरों की सुनसान सड़कों पर
हमारा ही शौर है
बहती हवाओं के साथ
बहनें का आगाज है
वरना,
मिलते कहाँ हैं
आजकल आदमियों के काफिले
वो बरसों से चौंतरा
खाली खाली सा पड़ा है
हमारी डाली तो कभी
सुनी नहीं रहतीं…….
पंछियों की आनंद ध्वनि से
खिल उठता है आस्माँ
किस धुन से कम नहीं होता वो
अंदाज़ वो गुंजल नज़ारा,
वरना कैसे होता
उनका बसेरा…….
कोई नहीं
दुर दुर तक
बड़ी बड़ी सिमेंट कॉन्क्रीट की इमारतें
दिख रहीं
उस चार दिवारों के अंदर
सब खुश है
शहरों की ये
ख्यालों पुलावी बाते
अब मेरे गाँव को खा रहीं है
गुम राहो पर हम
अकेले है खड़े
देख रहे
कोई मिलता है क्या
मेरे जैसा
जो भटका हुआ यहाँ तक आये……..